पंजाब की ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम निर्णायक चरण में, भगवंत मान सरकार ने नशे की रोकथाम के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान को दी गति

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– मानसिक स्वास्थ्य और नशे के सेवन पर पैनल चर्चा ने ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत भगवंत मान सरकार के समग्र दृष्टिकोण को उजागर किया

– युवाओं में नशे की रोकथाम के लिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और समय रहते हस्तक्षेप ज़रूरी: रायत-बहरा विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों की राय

– मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 11 अक्तूबर को पंजाब अगेंस्ट ड्रग्स बाइकर्स रैली को दिखाई हरी झंडी; सभी 23 ज़िलों से गुज़रेगी रैली, जनभागीदारी का किया आह्वान

(Krishna Raja) चंडीगढ़, 14 अक्तूबर 2026: पंजाब सरकार की नशा-विरोधी मुहिम ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के निर्णायक चरण में प्रवेश करने के साथ ही राज्य सरकार नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई में जनभागीदारी को मज़बूत करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य, समय रहते हस्तक्षेप और सामुदायिक सहयोग के महत्त्व को उजागर कर रही है, इस दिशा में राज्यभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से नशे की रोकथाम के लिए जागरूकता बढ़ाई जा रही है।

 

इसी कड़ी में, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को रायत -बहरा विश्वविद्यालय में ‘मेंटल हेल्थ एंड रिड्यूसिंग द डिमांड फॉर ड्रग्स’ विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसका आयोजन पंजाब के सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग और नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (एनएपीडीडीआर) के तहत डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (डीआईटीएसयू) द्वारा किया गया।

 

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने ज़ोर दिया कि नशे की समस्या को केवल शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक पहलू भी हैं। तनाव, अकेलापन, साथियों का नकारात्मक प्रभाव और निजी जीवन की परेशानियाँ युवाओं को नशे के प्रति संवेदनशील बना सकती हैं। इसलिए पंजाब सरकार की ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम के तहत समय रहते हस्तक्षेप, पारिवारिक सहयोग, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और ज़रूरत पड़ने पर समय पर पेशेवर सहायता लेने के महत्त्व को उजागर किया जा रहा है।

 

इस पैनल चर्चा के साथ राज्य के लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एलएमएचपी) के फेलो के लिए आयोजित सप्ताह भर के प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी समापन हुआ, इस कार्यक्रम को नशे की समस्या को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई देश की पहली फेलोशिप बताया गया।

 

चर्चा में मनोवैज्ञानिक प्रनीत कौर, मनोचिकित्सक डॉ. सुखतेज साहनी, सोशल इन्फ्लुएंसर मेहुल सैनी और मोटरसाइकिल राइडर शिवानी चौहान ने भाग लिया, कार्यक्रम में विद्यार्थी, राइडर समूहों के सदस्य और अन्य प्रतिभागी भी उपस्थित रहे।

 

विद्यार्थियों से आग्रह किया गया कि वे नशीले पदार्थों को आज़माने के लिए साथियों के दबाव में न आएँ। साथ ही, यदि किसी मित्र में नशे के सेवन के संकेत दिखाई दें, तो उसका मज़ाक उड़ाने या उसे अलग-थलग करने के बजाय उसे सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करें। विशेषज्ञों ने नशे की रोकथाम के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, खेलकूद एवं मनोरंजक गतिविधियों में भाग लेने और सकारात्मक मित्रता विकसित करने की सलाह दी।

 

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को अपनी भावनात्मक परेशानियों को दबाने के बजाय माता-पिता, शिक्षकों या अन्य विश्वसनीय लोगों के साथ साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया और यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।

 

इसी सुबह मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने फतेहगढ़ साहिब के छप्पड़ चिड़ी से ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम के निर्णायक चरण की शुरुआत की। उन्होंने पंजाब अगेंस्ट ड्रग्स बाइकर्स रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, यह रैली पूरे पंजाब में निकाली जाएगी। इसका उद्देश्य नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई को जन आंदोलन बनाना है।

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सभी लोगों से नशे के ख़िलाफ़ इस लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई केवल सरकार या पुलिस की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी ज़रूरी है।

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