मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा पराली जलाने को रोकने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान
– पंजाब सरकार के सशक्त प्रयासों के कारण 2023-25 के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में 86 प्रतिशत की कमी आई है : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– किसानों को प्रेरित करने के लिए एन.जी.ओज़. और समाजसेवियों को साथ जोड़ा जाए: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– सोशल मीडिया के द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– पराली के खेत में और खेत से बाहर प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाए: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
(Rajinder Kumar) चंडीगढ़, 1 सितंबर 2026: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज राज्य में पराली जलाने की प्रवृत्ति को और रोकने के लिए व्यापक सूचना और जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया, क्योंकि पंजाब सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण 2023 से 2025 तक ऐसी घटनाओं में पहले ही 86 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। अधिकारियों को इस अभियान को गांवों और ब्लॉकों तक और अधिक प्रभावी ढंग से ले जाने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन उपलब्धियों को मजबूत करने और पंजाब के पर्यावरण को बचाने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओज़.), समाजसेवियों, पंचायतों और किसानों की सक्रिय भागीदारी, बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया की पहुंच और मजबूत इन-सीटू तथा एक्स-सीटू (खेत में और खेत से बाहर) पराली प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
पराली प्रबंधन की रणनीति से संबंधित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि इस वर्ष पंजाब में लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई है, जिससे 18.81 मिलियन टन पराली उत्पन्न होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार के भरपूर प्रयासों के कारण पंजाब में 2023 से 2025 तक पराली जलाने की घटनाओं में 86 प्रतिशत की कमी आई है। ये घटनाएं 2023 में 36,663 से घटकर 2024 में 10,909 और 2025 में और घटकर 5,114 रह गई हैं। हमें इसे और आगे बढ़ाना है और यह सुनिश्चित करना है कि इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में और भी कमी आए।”
जमीनी स्तर पर तीव्र अभियान की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “किसानों को पराली जलाने के नुकसानों के प्रति जागरूक करने के लिए गांव और ब्लॉक स्तर पर व्यापक सूचना और जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। प्रत्येक हितधारक को किसानों को पराली जलाने के स्थायी विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करने हेतु मिलकर काम करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि किसानों को प्रेरित करने के प्रयासों को और मजबूत करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओज़.) और समाजसेवियों को इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “गैर-सरकारी संगठनों और समाजसेवियों को किसानों को प्रेरित करने के लिए साथ जोड़ा जाए। मशीनरी के प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक, सरपंचों के साथ बैठकें, शपथ ग्रहण समारोह और अन्य जागरूकता कार्यक्रम व्यापक स्तर पर करवाए जाएं ताकि यह संदेश जमीनी स्तर तक किसानों तक पहुंच सके।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जमीनी स्तर की गतिविधियों के पूरक के रूप में एक व्यापक डिजिटल और मल्टीमीडिया रणनीति अपनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, “रेडियो जिंगल्स, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, मोबाइल एस.एम.एस. और आउटडोर मीडिया को शामिल करते हुए विस्तृत डिजिटल योजना लागू की जानी चाहिए। पराली जलाने के दुष्प्रभावों और उपलब्ध प्रबंधन विकल्पों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया जागरूकता अभियान भी बड़े पैमाने पर चलाया जाना चाहिए।”
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों और ग्रामीण संस्थानों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रगतिशील किसानों, उत्कृष्ट प्रदर्शन वाली पंचायतों, पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसायटियों) और अन्य हितधारकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए। ऐसा सम्मान दूसरों को अच्छी प्रथाओं को अपनाने और पराली प्रबंधन को एक सामूहिक आंदोलन बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।”
उन्होंने इस रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी हितधारकों और जिलों के बीच आपसी समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सभी हितधारकों और जिलों के बीच बेहतरीन समन्वय सुनिश्चित किया जाए ताकि पूरी योजना को सुचारू और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रत्येक विभाग और हितधारक को समन्वय में काम करना चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने पराली के खेत में और खेत से बाहर प्रबंधन दोनों तरीकों के महत्व को भी उजागर किया। उन्होंने कहा, “धान की पराली के खेत में और खेत से बाहर प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि किसानों को बड़े पैमाने पर लाभ मिल सके और पर्यावरण की भी सुरक्षा हो सके। हमारा उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के व्यावहारिक और स्थायी विकल्प प्रदान करना होना चाहिए।”
बैठक में कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और हरदीप सिंह मुंडियां, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के.के. यादव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. रवि भगत, सचिव कृषि विभाग अर्शदीप सिंह थिंद और अन्य उच्च अधिकारी भी उपस्थित थे।
