प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर समिट–2026: 2022 से अब तक पंजाब में ₹1.50 लाख करोड़ का निवेश, 5 लाख नौकरियाँ सृजित

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(Rajinder Kumar) चंडीगढ़, 28 दिसंबर, 2025: कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने आज कहा कि ‘आप’ सरकार के सत्ता में आने के बाद अब तक पंजाब राज्य में 1.50 लाख करोड़ रुपये (लगभग 19 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का निवेश हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप पूरे राज्य में 5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये परिणाम पंजाब को निवेशकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य और अग्रणी औद्योगिक हब बनाने के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि पिछले 5 महीनों के दौरान पंजाब में एच.पी.सी.एल. मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एच.एम.ई.एल.) द्वारा 2,600 करोड़ रुपये, वर्धमान स्टील्स द्वारा 3,000 करोड़ रुपये, ट्राइडेंट ग्रुप द्वारा 2,000 करोड़ रुपये, आई.ओ.एल. केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड द्वारा 1,400 करोड़ रुपये, हैप्पी फोर्जिंग्स लिमिटेड द्वारा 1,000 करोड़ रुपये, वेरका बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 987 करोड़ रुपये, फोर्टिस हेल्थकेयर (मोहाली) द्वारा 900 करोड़ रुपये, अंबर एंटरप्राइजेज इंडिया लिमिटेड द्वारा 500 करोड़ रुपये, इंफोसिस लिमिटेड द्वारा 285 करोड़ रुपये तथा टोपन स्पेशलिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 300–400 करोड़ रुपये के प्रमुख निवेशों की घोषणा की गई है।

भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए उद्योग मंत्री ने कहा कि 6वां पंजाब प्रोग्रेसिव इन्वेस्टर समिट–2026 मोहाली में 13 से 15 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिससे राज्य में उद्योग–अनुकूल वातावरण के निर्माण को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा जापान और दक्षिण कोरिया के टोक्यो, ओसाका और सियोल के दौरे भी सफल रहे हैं और इससे कई नए निवेश आने की उम्मीद है, जिससे विदेशी उद्यमियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। निवेश को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी औद्योगिक अनुमतियां 5 से 45 दिनों के भीतर प्रदान की जा रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार द्वारा बिज़नेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान (बी.आर.ए.पी.)–2024 के अंतर्गत पंजाब को “टॉप अचीवर” का दर्जा दिया गया है। उद्योगों और व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए राज्य ने कुल ऋण राशि पर एकमुश्त 0.25 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी लागू की है, जिसमें सभी संबंधित खर्च शामिल होंगे तथा इसकी अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, इक्विटेबल मॉर्गेज पर रजिस्ट्रेशन शुल्क को 1,00,000 रुपये से घटाकर 1,000 रुपये कर दिया गया है।

पंजाब राइट टू बिज़नेस एक्ट, 2020 में किए गए संशोधनों के परिणामस्वरूप अब 5 से 18 दिनों के भीतर सैद्धांतिक अनुमतियां जारी की जा रही हैं और पात्र उद्यमी स्व-घोषणा के माध्यम से अपना व्यवसाय शुरू या उसका विस्तार कर सकते हैं। इस संबंध में लगभग 2,000 इकाइयों को पहले ही ऐसी अनुमतियां प्रदान की जा चुकी हैं। अनुमोदित ज़ोन में स्टैंड-अलोन उद्योगों से संबंधित आवश्यकताओं को समाप्त करते हुए सी.एल.यू. प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है।

कैबिनेट मंत्री ने आगे बताया कि भविष्य की सेक्टर-विशेष औद्योगिक नीति तैयार करने के लिए उद्योगों से परामर्श लेने हेतु 24 विशेष सेक्टरल कमेटियों का गठन किया गया है। प्रत्येक कमेटी की अध्यक्षता संबंधित क्षेत्र के प्रतिष्ठित उद्योगपति द्वारा की जाती है। इस संबंध में सभी कमेटियों द्वारा अपनी रिपोर्टें जमा कर दी गई हैं और एक नई व मजबूत औद्योगिक नीति तैयार की जा रही है, जिसे जनवरी 2026 तक जारी कर दिया जाएगा।

उन्होंने आगे बताया कि सरकार द्वारा मोहाली, बठिंडा, अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, गोबिंदगढ़ और खन्ना में “राइजिंग पंजाब – सुझाव से समाधान तक” श्रृंखला की शुरुआत की गई है, जिससे नीति निर्माण में उद्योगों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नई दिल्ली, गुरुग्राम, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद में आउटरीच डेलिगेशन की बैठकें भी आयोजित की गई हैं।

पंजाब सरकार द्वारा वर्तमान नीति के अंतर्गत आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं, जिनमें एस.जी.एस.टी. की अदायगी, बिजली कर और स्टांप ड्यूटी में छूट तथा एम.एस.एम.ई. के लिए विशेष प्रोत्साहन शामिल हैं। मार्च 2022 से अब तक 1,145 इकाइयों को 29,933 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रोत्साहन जारी किए जा चुके हैं।

उद्योग मंत्री ने कहा कि लगभग तीन दशकों से लंबित उद्योगों की मांगों का समाधान करते हुए वर्तमान आवंटियों के लिए दंडात्मक ब्याज में 100 प्रतिशत और साधारण ब्याज में 8 प्रतिशत की छूट के साथ एक ओ.टी.एस. योजना को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में परिवर्तन, प्लॉट फ्रैगमेंटेशन, सब-डिवीजन और पुनर्गठन से संबंधित नीतियां लागू की गई हैं तथा शिकायतों के निपटारे के लिए एक अपीलीय प्राधिकरण का भी गठन किया गया है।

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