किसानों को वायरस मुक्त पौधों के पोषण और विकास के लिए प्रोत्साहित कर रहा है पंजाब नर्सरी एक्ट

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चंडीगढ़ (11 अक्टूबर) : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं, जो राज्य के लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही हैं। कृषि प्रधान राज्य होने के कारण पंजाब पर मुख्यमंत्री भगवंत मान का विशेष ध्यान है। राज्य के किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाएं शुरू करने से लेकर, पंजाब के सीएम ने राज्य के नर्सरी एक्ट में भी संशोधन किया है, ताकि पौधों या बीजों की गुणवत्ता से समझौता न हो। भगवंत मान सरकार द्वारा पंजाब नर्सरी एक्ट, 1961 में दूसरी बार संशोधन किया गया है। इस नए नर्सरी एक्ट के अंतर्गत नर्सरी मालिकों को वायरस मुक्त पौधे तैयार करने के लिए बाध्य किया गया है। इन नियमों के अंतर्गत पंजीकृत बागवानी नर्सरियों को एक्ट के अंतर्गत शर्तें पूरी करने और वास्तविक पौधे विकसित करने के लिए दो साल का समय दिया गया है और किसानों के लिए इन बीजों को मदर प्लांट और रूटस्टॉक नर्सरियों में लगाना अनिवार्य किया गया है।

इसके अलावा, नर्सरी मालिकों के लिए इन पौधों की जांच करवाना भी अनिवार्य कर दिया गया है। सब्सक्राइबर लाइसेंस भी अनिवार्य कर दिया गया है। बीज के स्रोत और गुणवत्ता को बीज अधिनियम 1966 (केंद्रीय अधिनियम 54, 1966) के तहत विनियमित किया जाएगा।

बागवानी नर्सरी के रूप में पंजीकरण कराना होगा

बागवानी नर्सरियों (फलों, सब्जियों, पौधों आदि के लिए क्रॉस या स्व-विनियमित प्रजातियों को छोड़कर) को सी.यू. में पंजीकृत कराना होगा तथा पंजीकरण शुल्क 1000 रुपये बीज प्रमाणीकरण एजेंसी के खाते में जमा कराना होगा। नर्सरी लाइसेंस या लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन करते समय फॉर्म-10 भरकर आवेदन करना होगा।

इसके बाद बीज प्रमाणीकरण एजेंसी द्वारा नर्सरी लाइसेंसधारी को प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।

यह प्रमाण पत्र आपकी नर्सरी में किसी प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित किया जाएगा। फॉर्म-11, 12 और 13 के अनुसार बीज प्रमाणीकरण एजेंसी द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा तथा प्रति बीज 5000 रुपए का शुल्क लिया जाएगा।

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