एक थे राजीव- पंजाब के लिए खास प्यार वाले युवा पीएम

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चंडीगढ़, 20 अगस्त 2021 : आज जब देश भारत के पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी को उनकी जयंती पर याद कर रहा है तो उस समय पंजाब एवं पंजाबियों के लिए उनके मन के विशेष प्रेम को दर किनार नहीं किया जा सकता ।

अपनी मां श्रीमती इंदिरा गांधी की दुखद हत्या के बाद 1984 में पदभार ग्रहण करने वाले युवा प्रधान मंत्री उस समय नए भारत के प्रतीक के रूप में उभरे। देश को 21वीं सदी के कम्प्यूटरीकृत करने के लिए तैयार करने के बाद राजीव गांधी ने देश के सामने आने वाले विकट मुद्दों के समाधान पर विशेष ध्यान दिया। उनकी दूरदृष्टि और समझ ऐसी थी कि उन्होंने उग्रवाद विरोधी अभियानों का संचालन करने के लिए आज राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के रूप में जाना जाने वाला एक कुलीन बल तैयार किया जिसका सफल उपयोग अक्षरधाम मंदिर पर हमले और फिर 9/11 के हमले के दौरान देखा गया।

उनके द्वारा खरीदी गई बोफोर्स तोपें देश की रक्षा में एक मजबूत कवच साबित हुईं। उन्होंने पंजाब संकट को हल करने के लिए भी गंभीर प्रयास किए और राजीव-लोंगोवाल समझौता इस दिशा में एक सही कदम था। वह पंजाब के महत्व को जानते थे और इसलिए सुरक्षा खतरे के बावजूद उन्होंने देश के असली नायक शहीद भगत सिंह को सम्मान देने के लिए हुसैनीवाला का दौरा किया और पवित्र स्थान का नया रूप सुनिश्चित किया, जो आज कई युवाओं के लिए आकर्षण का स्रोत है।

इतना ही नहीं इस मुश्किल दौर में पंजाब को औद्योगीकरण के नक्शे पर लाने के लिए राजीव गांधी ने कपूरथला में करोड़ों रुपये की रेल कोच फैक्ट्री पंजाब को उपहार में दी थी। राज्य को राष्ट्रीय रोडमैप पर रखने के अलावा इसने हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी दिया जिससे राज्य को उच्च विकास पथ पर रखा गया। राजनीतिक रूप से भी उन्होंने पंजाब के मूल निवासी बूटा सिंह को अपना गृह मंत्री नियुक्त किया, यह पद सत्ता के सोपानों में नंबर दो माना जाता था। सत्ता से बेदखल होने के बाद भी राजीव का पंजाब से संबंध मजबूत बना रहा और वह हमेशा के लिए राज्य की चिंता करते रहे।

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